Principal’s Desk
प्रधानाचार्य की कलम से ......
भागो नहीं दुनिया को बदलो ...........
जैसा की ऊपर कहा गया देश – दुनिया के अंधेरे हाशिये पर जीने वाले लोग यहाँ होते हैं, वैसे ही देखा और महसूस किया जाता रहा है कि यहाँ देशी सामंतवाद, पूंजीवाद, अधिनायकवाद, जातिवाद इत्यादि की भी प्रबल और विकराल चुनौतियों रहीं हैं, जिनसे लोहा लेने के लिये माननीय रामलाल बाबू की उज्ज्वल विरासत को सम्हाले हुए उनके सुपुत्र धमदाहा के दो बार यशस्वी विधायक रहे, समाजवाद और सामाजिक न्याय की प्रखर चेतना से लैस श्रद्धेय सूर्यनारायण सिंह यादव ( जन्म – 01 जनवरी 1935 ई०, निधन – 24 जनवरी 2024 ) ने सत्तर के दशक में स्थापित इस महाविद्यालय की उन्नति के मार्ग को बहुत प्रशस्त बनाया । उन्होंने राज्य सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से बार – बार सत्याग्रह करते हुए आवश्यक अनुदान प्राप्त कर इस महाविद्यालय को अन्तरंग और बहिरंग से सम्बलित एवं समृद्ध किया ।
इन विभूतियों की साधन का यह प्राप्य है कि इक्कीसवीं शताब्दी के ढलते हुए दौर में यह रामलाल महाविद्यालय अपनी स्थापना के पचास वर्ष पूरे करते हुए बहुस्तरीय निर्माण, जीर्णोंद्धार, सुदृढ़करण एवं सौंदर्यीकरण के बहुविध कार्यों की प्रक्रिया से गुजरते हुए गतिमयता के साथ अग्रसर है ………। सीमांचल के अखंड ग्रामाञ्चल में अवस्थित इस रामलाल महाविद्यालय की कुछ अन्यतम विशेषताएँ : –
- पूर्णियाँ जनपद के धमदाहा विधानसभा क्षेत्र के सुदूर ग्रामाञ्चल में सबसे प्राचीन उच्च शिक्षा का केन्द्र, जहाँ पाँच जिलो के छात्र-छात्राएँ विगत चालीस वर्षों से उच्च शिक्षा का लाभ लेकर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं ।
- महाविद्यालय परिसर में कई भवन एवं कई भवन निर्माणाधीन, मुख्य भवन अर्थात् रुद्रनारायण सदन, में ग्यारह वर्गकक्ष, निर्माणाधीन सूर्यनारायण भवन में कम से कम दस वर्गकक्ष एवं सात प्रयोगशालाओं के कक्ष प्रस्तावित । फूल देवी रासमणि देवी सदन में सात नवनिर्मित सुसज्जित प्रयोगशालाएँ एक शिक्षक सदन, एक छात्रा विनोद कक्ष, क्रीड़ा – अनुभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यालय ।
- प्रशस्त एवं सुविस्तृत शिवनारायण क्रीड़ांगन जिसमें फूलबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, क्रिकेट एवं अन्य अनेक क्रीड़ा गतिविधियों का नियमित संचालन ।
- महाविद्यालय में अवस्थित बी. पी. मंडल पुस्तकालय में लगभग दस हजार पुस्तकें एवं लगभग एक हजार पत्र पत्रिकाएँ ( Journals ) ऊपर द्वितीय तल का निर्माण प्रक्रियाधीन । पुस्तकालय को Automated या स्वयंचालित पुस्तकालय बनाने का कार्य प्रगति पर ।
- महाविद्यालय का परिसर पूर्णतया Eco-Friendly एवं हरियाली से युक्त । विधुत ऊर्जा को बचाने निमित्त सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ।
- वर्षाजल के संचयन की व्यवस्था ।
- सुयोग्य, सुदक्ष एवं अनुभव प्रवण अध्यापकों के द्वारा नियमित सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक वर्गकार्यों का संचालन ।
- साफ – सुथरे एवं शांतिपूर्ण वातावरण में कदाचार मुक्त परीक्षाओं का संचालन ।
- यथा स्थान दस शौचालय एवं शुद्ध शीतल पेय हेतु ‘हिमसलिला’ की व्यवस्था ।
- दो SMART CLASS ROOM का निर्माण प्रगति पर ।
- रामलाल – स्मारक, रासमणि देवी स्मारक एवं सूर्यनारायण स्मारक – तीन स्मारकों का निर्माण कार्य सम्पन्न ।
- लोकतांत्रिक अनुशासन ।
- महाविद्यालय प्रशासन द्वारा संचालित कई समितियाँ ।