Ram Lal College

Welcome to Ram Lal College || A Constituent Unit Of Purnea University, Purnia || College under section 2 (f) and 12(B) of the UGC Act 1956.

Principal’s Desk

प्रधानाचार्य की कलम से ......

भागो नहीं दुनिया को बदलो ...........

ऊपर उन्नत मेघाच्छन्न नीलाकाश, नीचे हरीभरी धरती पर पश्चिम दिशा में बिहार राज्य उच्च पथ, पूर्व दिशा में माधवनगर ग्राम, उत्तर एवं दक्षिण में दूर तक फैली हुई हरियाली के सुरम्य विस्तार में लगभग अठारह एकड़ ( रेकॉर्ड में तिरासी एकड़ ) के विशाल भूखंड पर भव्य प्राचीर से घिरा हुआ राम लाल महाविद्यालय का रमणीय परिसर – एक सुंदर, सुखद स्वप्न की साकार परिणति की भाँति प्रतीत होता है, जिसे इसी क्षेत्र के बेचैन नायक, सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, सच्चे विकास पुरुष एवं शिक्षा संस्कृति के प्रेमी श्रद्धेय राम लाल सिंह यादव जी ने गहरी नींद में नहीं, दिन के उजाले में देखा था । धमदाहा विधान सभा क्षेत्र का इकलौता यह महाविद्यालय रामलाल बाबू की हिमालय से भी ऊँचे सोच का सुफल है । महानगरी पूर्णियाँ एवं भागलपुर से सुदूर ग्रामांचल, जहाँ बहुसंख्या में पिछड़े, अत्यंत पिछड़े अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब आमजन दो वक्त की रोटी के लिये अंतहीन लड़ाईयाँ लड़ते और हारते रहे हैं, जहाँ के बेपनाह बच्चे पर्याप्त प्रतिभा के होते हुए भी अपनी महत्वाकांक्षा एवं कल्पना से भरी हुई जिंदगी की लड़ाई यहीं स्थगित करने के लिये अभिशप्त होते रहे हैं, उन बच्चों के स्वर्णिम भविष्य की चिन्ता करते हुए मैला आँचल के सबसे अंधेरे इलाके में उच्च शिक्षा के केन्द्र के रूप में महाविद्यालय की स्थापना ( 29 नवंबर 1973 ई० ) करना – राम लाल बाबू के महान् त्याग और आत्मबलिदान को प्रतीकित करता है ।

जैसा की ऊपर कहा गया देश – दुनिया के अंधेरे हाशिये पर जीने वाले लोग यहाँ होते हैं, वैसे ही देखा और महसूस किया जाता रहा है कि यहाँ देशी सामंतवाद, पूंजीवाद, अधिनायकवाद, जातिवाद इत्यादि की भी प्रबल और विकराल चुनौतियों रहीं हैं, जिनसे लोहा लेने के लिये माननीय रामलाल बाबू की उज्ज्वल विरासत को सम्हाले हुए उनके सुपुत्र धमदाहा के दो बार यशस्वी विधायक रहे, समाजवाद और सामाजिक न्याय की प्रखर चेतना से लैस श्रद्धेय सूर्यनारायण सिंह यादव ( जन्म – 01 जनवरी 1935 ई०, निधन – 24 जनवरी 2024 ) ने सत्तर के दशक में स्थापित इस महाविद्यालय की उन्नति के मार्ग को बहुत प्रशस्त बनाया । उन्होंने राज्य सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से बार – बार सत्याग्रह करते हुए आवश्यक अनुदान प्राप्त कर इस महाविद्यालय को अन्तरंग और बहिरंग से सम्बलित एवं समृद्ध किया ।

इन विभूतियों की साधन का यह प्राप्य है कि इक्कीसवीं शताब्दी के ढलते हुए दौर में यह रामलाल महाविद्यालय अपनी स्थापना के पचास वर्ष पूरे करते हुए बहुस्तरीय निर्माण, जीर्णोंद्धार, सुदृढ़करण एवं सौंदर्यीकरण के बहुविध कार्यों की प्रक्रिया से गुजरते हुए गतिमयता के साथ अग्रसर है ………। सीमांचल के अखंड ग्रामाञ्चल में अवस्थित इस रामलाल महाविद्यालय की कुछ अन्यतम विशेषताएँ : –

Scroll to Top